Effects of diabetes on eye health

डायबिटीज़ से आँखों पर क्या असर होता है? 7 आम आँखों की समस्याएँ

डायबिटीज़ से आँखों पर क्या असर होता है? 7 आम आँखों की समस्याएँ

डायबिटीज़ में ब्लड शुगर लंबे समय तक ज़्यादा रहे तो आँखों की बारीक नसों, लेंस और नर्व पर असर पड़ता है। इससे डायबिटिक रेटिनोपैथी, मैक्युलर एडिमा, मोतियाबिंद, काला मोतिया (ग्लूकोमा), ड्राई आई, धुंधली नज़र और बढ़ने पर रेटिना की गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। ज़्यादातर समस्याएँ शुरू में बिना किसी लक्षण के होती हैं, इसलिए हर साल पुतली फैलाकर (डायलेटेड) आँखों की जाँच कराना ज़रूरी है। समय पर इलाज से नज़र बचाई जा सकती है।

डायबिटीज़ आँखों को नुकसान कैसे पहुँचाती है?

आँख के पीछे रेटिना (पर्दा) होता है, जिसमें बहुत पतली नसें होती हैं। शुगर लंबे समय तक ज़्यादा रहे तो ये नसें कमज़ोर हो जाती हैं, उनसे रिसाव होने लगता है या वे बंद हो जाती हैं।

इसके अलावा डायबिटीज़:

  • लेंस को जल्दी धुंधला कर सकती है
  • आँख का प्रेशर बढ़ा सकती है
  • आँसुओं की गुणवत्ता घटा सकती है
  • आँख की नसों को प्रभावित कर सकती है

डायबिटीज़ जितनी पुरानी और शुगर जितनी बेकाबू, ख़तरा उतना ज़्यादा।

डायबिटीज़ की 7 आम आँखों की समस्याएँ: एक नज़र में

#समस्याक्या होता हैचेतावनी के संकेत
1डायबिटिक रेटिनोपैथीरेटिना की नसों से रिसाव या खराबीशुरू में कोई लक्षण नहीं, बाद में धुंधलापन, काले धब्बे
2डायबिटिक मैक्युलर एडिमारेटिना के केंद्र में सूजनसीधा देखने में धुंधलापन, पढ़ने में दिक्कत
3मोतियाबिंदलेंस जल्दी धुंधला होता हैधुंधला दिखना, चमक चुभना, रंग फीके लगना
4काला मोतिया (ग्लूकोमा)आँख का प्रेशर बढ़नाशुरू में लक्षण नहीं, बगल की नज़र कम होना
5धुंधली या बदलती नज़रशुगर के उतार-चढ़ाव से लेंस में बदलावनज़र कभी साफ़, कभी धुंधली
6ड्राई आईआँसू कम बनना या गुणवत्ता खराब होनाजलन, किरकिरी, आँख थकी लगना
7विट्रियस हेमरेज / रेटिनल डिटैचमेंटआँख के अंदर खून आना या रेटिना का खिंचना (एडवांस स्टेज)अचानक नए फ्लोटर्स, चमक, पर्दे जैसी परछाईं

1. डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या है?

यह डायबिटीज़ की सबसे आम और गंभीर आँखों की समस्या है। रेटिना की नसों से पानी या खून रिसने लगता है। आगे चलकर नई, कमज़ोर नसें बनने लगती हैं।

सबसे ज़रूरी बात: शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखता। जब तक नज़र धुंधली होती है, तब तक नुकसान हो चुका होता है।

बाद के स्टेज में लक्षण:

  • धुंधला या धब्बेदार दिखना
  • आँखों के सामने तैरते काले धब्बे (फ्लोटर्स)
  • रात में देखने में परेशानी
  • अचानक नज़र कम हो जाना

2. डायबिटिक मैक्युलर एडिमा (DME) क्या है?

मैक्युला रेटिना का बीच वाला हिस्सा है, जिससे हम पढ़ते हैं, चेहरे पहचानते हैं और सीधा देखते हैं। यहाँ पानी भर जाने से सूजन आ जाती है और सामने की नज़र धुंधली हो जाती है।

यह रेटिनोपैथी के किसी भी स्टेज में हो सकती है। स्टेज के हिसाब से आँख में इंजेक्शन या लेज़र से इलाज किया जाता है।

3. डायबिटीज़ में मोतियाबिंद जल्दी क्यों हो जाता है?

शुगर ज़्यादा रहने पर लेंस के अंदर बदलाव आते हैं और वह धुंधला होने लगता है। डायबिटीज़ के मरीज़ों में मोतियाबिंद अक्सर कम उम्र में और तेज़ी से बढ़ता है।

इसका इलाज ऑपरेशन है। शुगर काबू में हो और रेटिना की जाँच पहले हो चुकी हो, तो डायबिटीज़ में भी यह आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। विस्तार से पढ़ें: Is Cataract Surgery Safe for People with Diabetes?

4. डायबिटीज़ में काले मोतिया (ग्लूकोमा) का ख़तरा

डायबिटीज़ के मरीज़ों में ग्लूकोमा का जोखिम ज़्यादा होता है। इसमें आँख का प्रेशर बढ़कर ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुँचाता है।

यह एक “चुपचाप” बढ़ने वाली बीमारी है। पहले बगल की नज़र घटती है, जो मरीज़ को तुरंत महसूस नहीं होती। आँख के प्रेशर की नियमित जाँच से इसे जल्दी पकड़ा जा सकता है।

बढ़ी हुई रेटिनोपैथी में एक ख़ास प्रकार का ग्लूकोमा (नियोवैस्कुलर ग्लूकोमा) भी हो सकता है, जिसमें प्रेशर बहुत तेज़ी से बढ़ता है.

5. धुंधली या बदलती नज़र

शुगर अचानक बढ़ने या घटने पर आँख का लेंस फूल या सिकुड़ सकता है। इसी वजह से नज़र कभी साफ़ और कभी धुंधली लगती है।

ध्यान रखें: नज़र अचानक बदले तो नया चश्मा बनवाने से पहले डॉक्टर से मिलें। शुगर स्थिर होने के बाद ही चश्मे का सही नंबर मिलता है। अगर धुंधलापन बना रहे, तो आँखों की पूरी जाँच ज़रूर कराएँ, क्योंकि इसके पीछे रेटिनोपैथी भी हो सकती है।

6. ड्राई आई (आँखों का सूखापन)

डायबिटीज़ आँख की नसों और आँसुओं की गुणवत्ता पर असर डालती है। इससे जलन, किरकिरी, लालिमा और आँखों में थकान होती है।

लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स और शुगर कंट्रोल से राहत मिलती है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन से पहले और बाद, दोनों समय ड्राई आई का इलाज ज़रूरी है।

7. विट्रियस हेमरेज और रेटिनल डिटैचमेंट (एडवांस स्टेज)

बढ़ी हुई रेटिनोपैथी में नई कमज़ोर नसें फट सकती हैं और आँख के अंदर खून आ सकता है (विट्रियस हेमरेज)। कुछ मामलों में निशान वाले ऊतक रेटिना को खींचकर उसकी जगह से हटा देते हैं (ट्रैक्शनल रेटिनल डिटैचमेंट)।

तुरंत डॉक्टर से मिलें अगर:

  • अचानक बहुत सारे नए फ्लोटर्स दिखें
  • रोशनी की चमक (फ़्लैश) दिखे
  • पर्दे या काली परछाईं जैसा कुछ दिखे
  • नज़र अचानक कम हो जाए

ऐसे में देरी करने से नज़र हमेशा के लिए जा सकती है।

डायबिटीज़ में आँखों की जाँच कब और कितनी बार कराएँ?

स्थितिसुझाई गई जाँच
टाइप 2 डायबिटीज़पता चलते ही, फिर हर साल पुतली फैलाकर आँखों की जाँच
टाइप 1 डायबिटीज़आमतौर पर पता चलने के कुछ साल बाद से, फिर हर साल (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
गर्भावस्था में डायबिटीज़डॉक्टर के कहने पर ज़्यादा बार
पहले से रेटिनोपैथी हैडॉक्टर के बताए समय पर, अक्सर 3 से 6 महीने में

जाँच में आमतौर पर डायलेटेड आई एग्ज़ाम, रेटिना की फ़ोटो या OCT स्कैन किया जाता है।

डायबिटीज़ से आँखों को बचाने के 6 तरीके

  • ब्लड शुगर को डॉक्टर के बताए दायरे में रखें
  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल काबू में रखें
  • नज़र ठीक हो तब भी हर साल डायलेटेड आई चेकअप कराएँ
  • धूम्रपान छोड़ें
  • दवाइयाँ और इंसुलिन डॉक्टर के कहे अनुसार लें
  • नज़र में अचानक बदलाव दिखे तो देर न करें

इंदौर में डायबिटिक आई ट्रीटमेंट: कब कौन-सा इलाज?

इलाज इस पर निर्भर करता है कि समस्या कौन-सी है और किस स्टेज में है।

समस्याआम इलाज
शुरुआती रेटिनोपैथीशुगर और BP कंट्रोल, नियमित निगरानी
बढ़ती रेटिनोपैथी / मैक्युलर एडिमालेज़र, आँख में इंजेक्शन
एडवांस रेटिनोपैथीसर्जरी (विट्रेक्टॉमी)
मोतियाबिंदमोतियाबिंद का ऑपरेशन
ग्लूकोमाड्रॉप्स, लेज़र या सर्जरी
ड्राई आईलुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स

अगर आप इंदौर में डायबिटिक आई ट्रीटमेंट (diabetic eye treatment in Indore) ढूँढ रहे हैं, तो ऐसा अस्पताल चुनें जहाँ डायलेटेड रेटिना जाँच, OCT स्कैन, रेटिना का इलाज और मोतियाबिंद की सुविधा एक ही जगह मिले।

इंदौर में डायबिटिक रेटिनोपैथी के लिए सबसे अच्छा अस्पताल कैसे चुनें?

  • पूरी डायलेटेड रेटिना जाँच और OCT स्कैन
  • लेज़र और इंजेक्शन जैसे रेटिना के इलाज
  • मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के अनुभवी सर्जन
  • साफ़ फॉलो-अप प्लान और आपके फ़िज़िशियन के साथ तालमेल
  • ऐसे डॉक्टर जो इलाज के विकल्प ईमानदारी से समझाएँ

रेटिना स्पेशैलिटी हॉस्पिटल इंदौर का एक डायबिटिक आई केयर सेंटर (diabetic eye care centre in Indore) है, जहाँ आपकी आँखों की जाँच डायबिटीज़ को ध्यान में रखकर की जाती है। अगर आपको डायबिटीज़ के लिए रेटिना स्पेशलिस्ट (retina specialist for diabetes in Indore) चाहिए, तो सबसे पहले डायलेटेड रेटिना चेकअप से शुरुआत करें।

हमारे डॉक्टर

रेटिना स्पेशैलिटी हॉस्पिटल में मोतियाबिंद और आँखों की सर्जरी की ज़िम्मेदारी डॉ. ऋतु वर्मा और डॉ. रोहित खत्री संभालते हैं।

  • डॉ. ऋतु वर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, कैटरेक्ट, रिफ्रैक्टिव और कॉर्निया सर्जन (MBBS, DOMS ऑप्थल्मोलॉजी)। मोतियाबिंद और IOL सर्जरी, LASIK, कॉर्निया और कंजंक्टिवाइटिस में विशेषज्ञता
  • डॉ. रोहित खत्री, सीनियर कंसल्टेंट, कैटरेक्ट, रिफ्रैक्टिव और ग्लूकोमा (MBBS, MS, FNABEH, FICO)। पहले शंकरा आई सेंटर, इंदौर और डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल, इंदौर में कंसल्टेंट रहे। मोतियाबिंद, रिफ्रैक्टिव सर्जरी और ग्लूकोमा के इलाज में विशेषज्ञता

डायबिटीज़ में मोतियाबिंद और ग्लूकोमा, दोनों का ख़तरा बढ़ता है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए इन दोनों डॉक्टरों का अनुभव काम आता है।

डॉ. ऋतु वर्मा से अपॉइंटमेंट बुक करें | डॉ. रोहित खत्री से अपॉइंटमेंट बुक करें: [booking URL यहाँ डालें]

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. डायबिटीज़ से आँखों पर क्या असर होता है?
डायबिटीज़ रेटिना, लेंस और आँख की नसों पर असर डालती है। इससे रेटिनोपैथी, मैक्युलर एडिमा, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और ड्राई आई हो सकते हैं।

2. डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण क्या हैं?
शुरू में अक्सर कोई लक्षण नहीं होता। बाद में धुंधला दिखना, फ्लोटर्स, काले धब्बे और अचानक नज़र कम होना हो सकता है।

3. क्या डायबिटिक रेटिनोपैथी ठीक हो सकती है?
इलाज से नज़र को बचाया जा सकता है और बिगड़ने से रोका जा सकता है। जो नुकसान हो चुका है, वह हमेशा वापस नहीं आता, इसलिए जल्दी जाँच ज़रूरी है।

4. डायबिटीज़ में आँखों की जाँच कितनी बार करानी चाहिए?
आमतौर पर साल में एक बार डायलेटेड आई एग्ज़ाम। ज़रूरत हो तो डॉक्टर ज़्यादा बार भी कह सकते हैं।

5. क्या शुगर कंट्रोल में रखने से आँखें सुरक्षित रहती हैं?
हाँ, शुगर, BP और कोलेस्ट्रॉल काबू में रखने से ख़तरा काफ़ी कम हो जाता है। फिर भी सालाना जाँच ज़रूरी है।

6. क्या डायबिटीज़ में मोतियाबिंद का ऑपरेशन सुरक्षित है?
हाँ, आमतौर पर सुरक्षित है, बशर्ते शुगर काबू में हो और रेटिना की जाँच हो चुकी हो।

7. धुंधली नज़र डायबिटीज़ की वजह से है या चश्मे की?
दोनों हो सकते हैं। सही वजह आँखों की पूरी जाँच से ही पता चलती है।

8. रेटिनोपैथी का इलाज क्या है? स्टेज के हिसाब से लेज़र, आँख में इंजेक्शन या सर्जरी। शुरुआती स्टेज में निगरानी और शुगर कंट्रोल ही काफ़ी हो सकता है।

9. इंदौर में डायबिटिक रेटिनोपैथी के लिए सबसे अच्छा अस्पताल कौन-सा है?
ऐसा अस्पताल चुनें जहाँ रेटिना की जाँच, इलाज और मोतियाबिंद की देखभाल एक साथ मिले, जैसे रेटिना स्पेशैलिटी हॉस्पिटल, इंदौर।

10. डायबिटीज़ के लिए रेटिना स्पेशलिस्ट से कब मिलना चाहिए?
साल में एक बार डायलेटेड जाँच के लिए, और नज़र अचानक कम होने, फ्लोटर्स या फ़्लैश दिखने पर तुरंत।

11. रेटिना स्पेशैलिटी हॉस्पिटल, इंदौर में मोतियाबिंद के सर्जन कौन हैं?
डॉ. ऋतु वर्मा और डॉ. रोहित खत्री, जो कैटरेक्ट और रिफ्रैक्टिव सर्जरी में सीनियर कंसल्टेंट हैं।

निष्कर्ष

डायबिटीज़ आँखों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाती है, और ज़्यादातर समस्याएँ शुरू में दिखती नहीं। शुगर और BP पर नियंत्रण, हर साल डायलेटेड आई चेकअप और समय पर इलाज से आप अपनी नज़र सुरक्षित रख सकते हैं। नज़र में कोई भी बदलाव दिखे तो इंतज़ार न करें।

आज ही अपनी आँखों की जाँच कराएँ

अगर आपको डायबिटीज़ है या इंदौर में डायबिटिक आई ट्रीटमेंट चाहिए, तो रेटिना स्पेशैलिटी हॉस्पिटल, इंदौर में डॉ. ऋतु वर्मा या डॉ. रोहित खत्री से मिलें। अभी कॉल करें .

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